किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और सरंक्षण) अधिनियम, 2000 के तहत विशेष किशोर पुलिस एकांश का गठन

महिला तथा बाल सहायता दूरभाष सं. 1098 (टोल फ्री)

ऐसा माना जा रहा है कि किसी भी जनसंख्या में बच्चों की संख्या अतिसंवेदनशील वर्ग है जिन्हें विशेष देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है भारत का संविधान राज्य पर यह सुनिशिचत करने का दायित्व दिया है कि बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है और उनकी बुनियादी मानवीय अधिकारों को सुरक्षा प्रदान किया जा रहा है ।

यह अधिनियम पुलिस को कुछ दायित्व सौंपता है और किषोर न्याय बोर्ड, विशेष किशोर पुलिस एकांश और किशोर अधिकारियों सहित कुछ संस्थानों की स्थापना पर बल देता है इसका उद्धेशय यह सुनिष्चित करना है कि जो किषोर विधि के विरूद्ध है अथवा अन्य बच्चे जिन्हें संरक्षण की आवष्यकता है उन पर उचित ध्यान दिया जा रहा है । इस स्थायी आदेश का उद्देष्य विधिविरूद्ध किशोरो सहित बच्चों के संबंध में दिए गए ड्यूटी और अधिनियम के प्रमुख उपबंधों के प्रति पुलिस अधिकारियों को जागरूक बनाना है ।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ:-

किशोर से क्या अभिप्राय है ?

अधिनियम के तहत किशोर से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिन्होंने अठारह वर्ष की आयु पूरा नहीं की है ।

किशोर न्याय बोर्ड

विधिविरूद्ध किशोर के संबंध में शक्तियों का प्रयोग करने और कर्त्तव्य के निर्वहन के लिए राज्य सरकार द्वारा किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया जाएगा । केवल बोर्ड को विधि विरूद्ध किशोर से संबंधित कार्यों के तहत कार्यवाहियों को करने की षक्तियाँ प्राप्त होगी ।

विशेष किशोर पुलिस एकांश :-

विशेष किशोर पुलिस एकांश से अभिप्राय अधिनियम की धारा 63 के तहत किशोरो अथवा बालकों को संभालने के लिए अभिहित किसी राज्य का पुलिस बल एकांश है। अंडमान तथा निकोबार पुलिस का महिला तथा बाल सहायता एकांश किशोर पीड़ितों और अपचारियों से संबंधित सभी मामलों के लिए विशेष किशोर पुलिस एकांश होगा । पुलिस उप अधीक्षक महिला तथा बाल सहायक एकांश किशोरो से संबंधित सभी मामलों में नोडल अधिकारी होंगे।

किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी

यह अधिनियम इस बात पर बल देता है कि प्रत्येक थाना प्रभारी को अभिक्षमता और उपयुक्ता का प्रषिक्षण प्राप्त हो और अभिविन्यास को किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी के रूप में पदनामित किया जाए, जो किशोरो की देखरेख करेंगे । अतः संलग्न अनुसूची (अनुलग्नक क) के अनुसार प्रत्येक पुलिस थाना में एक गैर सरकारी संगठन/ओ.आर. है जिन्हें बाल कल्याण अधिकारी के हैसियत से पदनामित किया जाएगा । इस सूची को प्रत्येक तिमाही में एक बार अद्यतन किया जाएगा ताकि यह सुनिशिचत किया जा सके कि स्थानान्तरण के कारण हुए परिवर्तन सभी संबंधितों को सूचित कर दिया गया है। अद्यतन सूची वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंडमान तथा निकोबार द्वारा जारी की जाएगी लेकिन थानाध्यक्ष अधिनियम के उपबंधों को लागू करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे ।

अधिनियम द्वारा पुलिस पर अधिरोपित कर्तव्य

    1. विधि विरूद्ध किसी किशोर को पुलिस द्वारा जैसे ही गिरफ्तार किया जाता है उन्हें विशेष किशोर पुलिस एकांष अथवा पदनामित पुलिस अधिकारी के प्रभाराधीन रख दिया जाता है जो तत्काल मामले की रिपोर्ट किषोर न्याय बोर्ड के सदस्य को देगा । जब तक अंडमान तथा निकोबार में ऐसे बोर्ड का गठन नहीं कर लिया जाता किषोर को संबंधित न्यायालय के समक्ष पेष किया जाएगा ।
    2. पुलिस थाना के पुलिस अधिकारी किषोर अपराध के निपटान के अलावा महिला तथा बाल हेल्प लाइन के कॉल लेने के लिए और बाल दुर्व्यवहार के मामलों की जाँच करने के लिए नोडल अधिकारी भी होगे । ‘महिला तथा बाल हेल्पलाइन का दूरभाश सं. 1098 (टॉल फ्री) है । यह दूरभाश सं. को सभी पुलिस थाना और अन्य एकांषों के नोटिस बोर्ड पर दर्षाए जाने चाहिए ।
    3. थानाध्यक्ष यह सुनिशिचत करेंगे कि पदनामित अधिकारी बाल पीड़ित मामलों को देखने के साथ -साथ अन्य मामलों को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे ।
    4. किशोर जिन्हें थाना प्रभारी द्वारा गिरफ्तार किया जाता है और उन्हें जमानत नहीं दिया जाता उन्हें जब तक बोर्ड/न्यायालय के समक्ष पेश नहीं कर दिया जाता, उन्हें संप्रेक्षण गृह में रखा जाएगा ।
    5. थाना प्रभारी/अधिकारी किशोर को गिरफ्तार करने के तुरन्त बाद इसकी सूचना किशोर के माता-पिता अथवा अभिभावक को देंगे और उन्हें बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निदेश देंगे । थाना अधिकारी/ प्रभारी ऐसी गिरफ्तारी की सूचना परिवीक्षा अधिकारी को भी देंगे। ताकि वह किशोर के पूर्ववृत्त और उसके परिवार की पृश्ठभूमि की जानकारी प्राप्त कर सके।
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