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    1. निषेधात्मक आदेश से क्या तात्पर्य है?

      निशेधात्मक आदेश से तात्पर्य विभिन्न अधिनियम अर्थात; 1951 दंड प्रक्रिया संहिता, पुलिस अधिनियम आदि के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारियों द्वारा कुछ चीजों के लिए मनाही के लिए जारी आदेश है । बी.पी. एक्ट 1951 की धारा 37 के अंतर्गत सी.पी./डी.एम. द्वारा निशेधात्मक आदेश जारी किए जाते हैं । ऐसे आदेश की वैधता 15 दिनों (एक समय पर) के लिए होती है और इसे समय-समय पर जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी द्वारा नवीकरण किया जा सकता है । धारा 37 के अंतर्गत उपर्युक्त संदर्भित निशेधात्मक आदेश निम्नलिखित की मनाही के लिए किया जाता है -
      a) 5 या इससे अधिक व्यक्तियों का एक साथ इकट्ठा होना
      b) किसी प्रकार की शोभायात्रा/जुलूस
      c) लाउडस्पीकर्स एम्लीफाइंग उपकरण, म्यूजिकल बैंड का प्रयोग तथा पटाखे फोड़ना
      d) हथियार, डंडा, छड़ी या लाठी, तलवार, भाला, चाकू बिना लाइसेंस वाले बंदूक या कोई अन्य सामग्री रखना जिससे शारीरिक क्षति या हिंसा भड़काता हो ।
      e) किसी प्रकार के संक्षारक या विस्फोटक पदार्थ रखना या पत्थर जैसी कोई वस्तु को जमा करना या अन्य कोई उपकरण जिससे कि शारीरिक क्षति या हिंसा भड़काता हो ।
      पुतला जलाना, लाश या प्रतिमा रखकर प्रदर्शन करना, जन अभिव्यक्ति/जोर से रोना, गाना गाना, संगीत बजाना, उत्तेजित भाषण देना, सद्भावना प्रदर्शन या झूठा प्रदर्शन, चित्रों, चिन्हों, प्लेकाड या अन्य कोई वस्तु/चीजों का प्रदर्शन अथवा प्रचार, पुलिस की राय में जिससे शिष्टता/नैतिकता या सुरक्षा भंग होती हो या राज्य की तख्ता पलट होने की संभवना हो
    2. बी.पी अधिनियम 1951 की धारा 37 के तहत जारी निशेधात्मक आदेशो का उल्लंघन/भंग करने के लिए क्या सजा है ?
    3. ऐसे उल्लंघन के लिए बी.पी. अधिनियम 1951 की धारा 135 के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ।
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