1.   प्रथम सूचना रिपोर्ट क्या  है ?

    प्रथम सूचना रिपोर्ट से तात्पर्य किसी संज्ञेय अपराध के होने के बारे में पुलिस के पास दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट से है । वास्तव में इससे पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी को संज्ञेय अपराध के घटित होने से संबंधित सूचना देकर कानूनी कार्रवाई को आरंभ किया जााता है । इसे लिख कर सूचना देने वाले का पढ़कर सुनाया जाता है इसके बाद इसमें सूचना देने वाले व्यक्ति का हस्ताक्षर लिया जाता है प्रथम सूचना रिपोर्ट (जैसा पुलिस द्वारा रिकार्ड किया गया है ) की एक प्रति शिकायतकर्ता या सूचना देने वाले व्यक्ति के निःशुल्क दी जाती है ।

  2. प्रथम सूचना रिपोर्ट कैसे दर्ज कराएँ ? 

    सूचना देनेवाले व्यक्ति/शिकयतकर्ता को क्षेत्राधिकार वाले पुलिस थाना (जहाँ अपराध हुआ है) में जाकर संज्ञेय अपराध के होने के बारे में प्रभारी अधिकारी/थानाध्यक्ष को रिपोर्ट करना होता है । यदि दूरभाष द्वारा सूचित किया गया है तो सूचना देने वाले व्यक्ति/शिकायतकर्ता को प्रथम सूचना रिपोर्ट के पंजीकृत कराने हेतु इसके बाद पुलिस थाना जाना होगा ।  

  3.  संज्ञेय मामला या संज्ञेय अपराध क्या है ? 

    संज्ञेय अपराध से तात्पर्य वह मामला जिसमें पुलिस अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता (1973) के प्रथम अनुसूची के अनुसार या तत्समय लागू किसी अन्य कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है ।

  4.  ‘‘संज्ञान में लेना ’शब्द से क्या तात्पर्य है ?

    ‘‘संज्ञान में लेना ’’ शब्द को दंड प्रक्रिया संहिता में परिभाषित नहीं किया गया है । जब कोई मजिस्ट्रेट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 190(1)(क) के अंतर्गत संज्ञान लेता है तो उसे केवल याचिका सार पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि उसे दंड प्रक्रिया संहिता में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए विशेष तरीके से कार्यवाही के प्रयोजन हेतु कार्य करना चाहिए और इसके बाद शिकायत को आगे की जाँच हेतु भेजेंगे । मजिस्ट्रेट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत अन्वेषण की आदेश भी दे सकते हैं । 

  5. गैर -संज्ञेय अपराध क्या है ?

    गैर-संज्ञेय अपराध से तात्पर्य वह अपराध जिसमे पुलिस अधिकारी बिना वारंट के गिरफ्तार नही कर सकते है ।

  6.  मैं गैर-संज्ञेय शिकायत कैसे दर्ज करूँ ? 

    ऐसे अपराधों के बारे में सूचना प्रथम सूचना रिपोर्ट कें अंतर्गत उल्लिखित अनुसार ही दिया जाना है । प्रभारी अधिकारी गैर-संज्ञेय अपराध होने के बारे में लिखित शिकायत को सक्षिप्त करके लिखेगा ओर उसकी एक प्रति शिकायतकर्ता को निःशुल्क देगा कोई पुलिस अधिकारी गैर-संज्ञेय मामले का अन्वेषण तब तक नहीं कर सकेगा जब तक कि मजिस्ट्रेट जिसे ऐसे मामले को विचारण के लिए शक्तियाँ प्राप्त है से पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं कर लेता ।

  7.  ‘‘शिकायत’’ से क्या तात्पर्य है ? 

    शिकायत से तात्पर्य कुछ व्यक्ति (चाहे परिचित या अपरिचित हो) ने अपराध किया है, के विरूद्ध दंड प्रक्रिया संहिता (1973) के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए मजिस्ट्रेट को दी गई मौखिक अथवा लिखित शिकायत है ।

  8. सार्वजनिक स्थल से क्या तात्पर्य है ?

    सार्वजनिक स्थल के अंतर्गत शामिल (और इससे तात्पर्य) -तटाग्र, प्रत्येक सार्वजनिक भवन या स्मारक को किनारे का क्षेत्र, अहाते और जल लेने, कपड़े धोने, स्नान करने या मनोरंजन के प्रयोजन हेतु जनता के पहुँच वाले सभी स्थानों से है । (बी.पी. एक्ट 1951 धारा 2(13)।
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